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गणेश चतुर्थी पर भूलकर भी न देखें चंद्रमा, वरना चंद्र दोष के कारण लग सकता है झूठा आरोप

दैनिक भास्कर लोगो दैनिक भास्कर 12-09-2018 dainikbhaskar.com

a person wearing a costume © dainikbhaskar.com

गणेश चतुर्थी पर भूल से भी चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। वरना झूठे आरोप लग सकते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने भी चंद्रमा का दर्शन कर लिया था जिससे उन पर भी चोरी का झूठा आरोप लगा था। ये बात नारद ऋषि ने श्रीकृष्ण को बताई थी। फिर कृष्ण भगवान ने गणेश जी की पूजा की और उस आरोप से मुक्ति पाई। पौराणिक कथा के अनुसार भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी पर चंद्रमा को दिए गए गणेश जी के श्राप की वजह से ऐसा होता है, लेकिन भूल से चंद्रमा देख लेने पर पुराणों में आरोप से मुक्ति के लिए मंत्र भी बताया गया है। जिसको पढ़ने से चंद्र दर्शन का दोष नहीं लगता है।

मंत्र - 

सिंह: प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हत:।

सुकुमार मा रोदीस्तव ह्येष: स्यमन्तक:।।

इस मंत्र के प्रभाव से कलंक नहीं लगता है। जो मनुष्य झूठे आरोप-प्रत्यारोप में फंस जाए, वह इस मंत्र को जपकर आरोप से मुक्त हो सकता है। अगर मंत्र न पढ़ा जाए तो गणेश जी की पूजा और व्रत करने से इसका दोष नहीं लगता है।

श्रीगणेश ने दिया था चंद्रमा को श्राप, ये है पूरी कथा - 

भगवान गणेश को गज का मुख लगाया गया तो वे गजवदन कहलाए और माता-पिता के रूप में पृथ्वी की सबसे पहले परिक्रमा करने के कारण अग्रपूज्य हुए। सभी देवताओं ने उनकी स्तुति की पर चंद्रमा मंद-मंद मुस्कुराता रहा। उसे अपने सौंदर्य पर अभिमान था। गणेशजी समझ गए कि चंद्रमा अभिमानवश उनका उपहास करता है। क्रोध में आकर भगवान श्रीगणेश ने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि- आज से तुम काले हो जाओगे। 

चंद्रमा को अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने श्रीगणेश से क्षमा मांगी तो गणेशजी ने कहा कि सूर्य के प्रकाश से तुम्हें धीरे-धीरे अपना स्वरूप पुनः प्राप्त हो जाएगा, लेकिन आज (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) का यह दिन तुम्हें दंड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। जो कोई व्यक्ति आज तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर चोरी का झूठा आरोप लगेगा। इसीलिए भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं किया जाता।


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