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नीचे ‘बरमूडा ट्रायंगल’ नहीं था, फिर जहाज़ हवा में कैसे ग़ायब हुआ?

Lallantop लोगो Lallantop 08-03-2021 Lallantop.in

आज 08 मार्च है. और इस तारीख़ का ताल्लुक़ है एक विमान के हवा में ग़ुम हो जाने से.

हालांकि हवाई हादसे किसी भी अन्य हादसों के मुक़ाबले काफ़ी दुर्लभ हैं. लेकिन ख़ुदा न ख़ास्ता जब भी ये होते हैं, सुर्ख़ियां बन जाते हैं. इसलिए ही तो तारीख़ में आज से पहले भी हम दो हवाई हादसे ऑलरेडी कवर कर चुके हैं. एक जिसमें पायलट की सूझबूझ से सारे यात्री बच गए. दूसरा जिसमें पायलट की कई ग़लतियों के चलते, जितने यात्री विमान में थे उससे भी ज़्यादा मौतें हो गईं. इसके अलावा हमने पाकिस्तान में हुए एक विमान अपहरण को भी तारीख़ में कवर किया है.

मगर आज हम बात करेंगे, एक अजीब से विमान हादसे की, जिसमें विमान और उसमें बैठे 239 यात्रियों का क्या हुआ, आज तक पता नहीं चला. किसी विमान का ऐसे हवा में ग़ुम हो जाना इसलिए आश्चर्यचकित करता है, क्यूंकि एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल से लेकर ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट रिकॉर्डिंग तक ऐसी दसियों चीज़ें हैं जिसके चलते विमान ऐसे अचानक ग़ायब नहीं हो सकता. और हो भी जाए तो हमेशा के लिए लुप्त नहीं रह सकता. मगर ऐसा हुआ. मलेशियन एयरलाइंस की फ़्लाइट 370 के साथ.

# हादसा-

08 मार्च, 2014. मलेशियन एयरलाइंस की फ़्लाइट संख्या 370 मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ी. ठीक सुबह के 12:42 बजे. मतलब मध्यरात्रि की बीते हुए लगभग पौना घंटा हो चुका था. केबिन में 10 फ्लाइट अटेंडेंट थीं, सभी मलेशियाई मूल की. 227 यात्रीयों में से अधिकांश यात्री चीनी थे. 38 मलेशियाई. फ़्लाइट में कुछ अन्य देशों के भी इक्का-दुक्का नागरिक यात्रा कर रहे थे.

फ़्लाइट MH 370 का शेड्यूल रूट. (गूगल मैप्स) © Lallantop द्वारा प्रदत्त फ़्लाइट MH 370 का शेड्यूल रूट. (गूगल मैप्स)

जो स्टैंडर्ड प्रोसिज़र होता है उसी हिसाब से, फ़र्स्ट ऑफ़िसर फ़ारिक जहाज उड़ा रहे थे और कैप्टन ज़ाहरी आलम शाह ने रेडियो कम्यूनिकेशन संभाल रखा था. ज़ाहरी की बातें थोड़ी असामान्य थीं. जैसे, एक बजकर एक मिनट पर उन्होंने कहा कि वो 35,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंच गए हैं. जबकि स्टैंडर्ड ये है कि आपको किसी ऊंचाई पर पहुंचने पर नहीं, उस ऊंचाई से हटने (यानी ऊपर या नीचे जाने पर) रिपोर्ट करना होता है. एक बजकर आठ मिनट पर फ़्लाइट ने मलेशियाई समुद्र तट को पार किया और वियतनाम की दिशा में जाने लगी. ज़ाहरी ने फिर से विमान का स्तर 35,000 फीट बताया.

ग्यारह मिनट बाद, कुआलालंपुर के एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल ने इस फ़्लाइट के क्रू मेम्बर्स के लिए एक संदेश प्रसारित किया-

मलेशियन तीन सात शून्य, हो ची मिन्ह एक दो शून्य दशमलव नौ से संपर्क करें. शुभ रात्रि.

ज़ाहरी ने उत्तर दिया-

शुभ रात्रि. मलेशियन तीन सात शून्य.

ये MH370 फ़्लाइट में से आई आख़िरी आवाज़ थी. इसके बाद कई ज़ोन्स के कई हवाई अड्डों के ग्राउंड स्टाफ़ ने कई बार इस फ़्लाइट से संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन कोई फ़ायदा न हुआ. विमान ग़ायब हो चुका था. हमेशा-हमेशा के लिए.

न फ़्लाइट मिली न उसकी ख़बर. ख़बरें मिल रही थीं तो बस उसके ग़ुम होने और कभी न मिलने को पुख़्ता करतीं. (तस्वीर: AFP) © Lallantop द्वारा प्रदत्त न फ़्लाइट मिली न उसकी ख़बर. ख़बरें मिल रही थीं तो बस उसके ग़ुम होने और कभी न मिलने को पुख़्ता करतीं. (तस्वीर: AFP)

# सबसे महंगी खोजबीन-

मलेशियाई वायुसेना के आंकड़ों से पता चला कि जैसे ही MH370 रडार से गायब हुआ, वो तेजी से दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुड़ गया. इसके बाद वो मलय प्रायद्वीप के ऊपर से उड़ा. फिर पेनांग द्वीप के चारों ओर घूमने के बाद वहां से उत्तर पश्चिम दिशा की ओर मुड़ा. और अंत में अंडमान सागर को पार कर चुकने के बाद रडार की रेंज से ओझल हो गया.

इसके पूरे रूट का अध्ययन करने के बाद विशेषज्ञों ने पाया कि ये अपहरण का मामला नहीं हो सकता था. न ही ये एक्सिडेंट या पायलट के आत्महत्या करने का मामला हो सकता था. मलेशिया की सरकार ने क्रू और यात्रीयों का बैकग्राउंड चेक भी करवाया था. उसमें भी कोई आशंकित करने वाली चीज़ नहीं पाई गई थी. हालांकि कुछ सोर्सेज़ के अनुसार कैप्टन ज़ाहरी का हाल ही में तलाक़ हुआ था और उनके साथ कई और घरेलू दिक़्क़तें भी चल रही थीं. यूं इन सोर्सेज़ का मानना था कि शायद प्लेन का क्रैश होना कैप्टन ज़ाहरी की आत्महत्या का कोलेट्रल डैमेज था.

गूगल मैप्स के इस स्क्रीनशॉट के माध्यम से हमने वो अधिकांश क्षेत्र कवर करने के प्रयास किए हैं, जिनका ज़िक्र स्टोरी में हैं. और ख़ासतौर पर वो एरिया जिसमें रास्ता भटकने के बाद MH370 ने यात्रा की. © Lallantop द्वारा प्रदत्त गूगल मैप्स के इस स्क्रीनशॉट के माध्यम से हमने वो अधिकांश क्षेत्र कवर करने के प्रयास किए हैं, जिनका ज़िक्र स्टोरी में हैं. और ख़ासतौर पर वो एरिया जिसमें रास्ता भटकने के बाद MH370 ने यात्रा की.

आश्चर्य की बात ये थी कि इस अपने रूट से भटकने के बाद पूरे दौरान प्लेन ऑटो पायलट मोड में था. मतलब इसे ऐसे समझ लीजिए कि 6 घंटों तक प्लेन को कोई इंसान नहीं चला रहा था. और बाद में भी ये हिंद महासागर में किसी हादसे के वजह से नहीं, ईंधन ख़त्म हो जाने के चलते क्रैश हुआ था. हालांकि उसका शुरुआत में तेजी से दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुड़ना पूरी तरह मानवीय घटना थी. मतलब ये एक ऐसी चीज़ थी, जो पायलय या फ़र्स्ट ऑफ़िसर में से ही किसी एक के द्वारा अंजाम दी ज़ा सकती थी.

प्रारंभिक खोज ‘साउथ चाइना सी’ पर केंद्रित की गई. लेकिन 7 अलग-अलग देशों के 34 समुद्री जहाज़ों, 28 विमानों और कुछ सैटेलाइटों को खोज में लगा चुकने के बावज़ूद कहीं कुछ नहीं मिला.

बाद में रूट के बारे में सही-सही जानकारी मिलने के उपरांत खोज के प्रयास ‘मलक्का की जलसंधि’ और अंडमान सागर पर केंद्रित हो गए. 15 मार्च को, ‘सैटेलाइट ट्रांसमिशन’ के सिग्नल्स से कुछ और जानकारियां पता चलीं. जिसके बाद खोज को और इलाक़ों में फैला दिया गया.

संभावित क्रैश साइट के सबसे नज़दीक कोई बड़ा देश था तो वो ऑस्ट्रेलिया था. इसलिए बाद में उसने ही इस खोजबीन के बड़े भाग की ज़िम्मेवारी ली.

जल-थल-वायु. हर जगह पर, हर जगह से तलाश की गई. (तस्वीर: AFP) © Lallantop द्वारा प्रदत्त जल-थल-वायु. हर जगह पर, हर जगह से तलाश की गई. (तस्वीर: AFP)

फ़्लाइट MH370 की खोज दुनिया की सबसे महंगी ‘मरीन सर्च’ हो चुकी थी लेकिन फिर भी 2015 तक मलबे का एक टुकड़ा नहीं मिल पाया था.

# क्या विमान टाइम ट्रैवल पर निकल गया-

फिर 29 जुलाई, 2015 को ‘रियूनियन’ नाम के फ्रांसीसी द्वीप के एक समुद्र तट पर ‘राइट विंग फ्लेपरन’ मिला. आसान भाषा में कहें तो विमान का एक छोटा सा हिस्सा मिला. इसके अगले डेढ़ साल के भीतर तंजानिया, मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका, मेडागास्कर और मॉरीशस के तटों पर मलबे के 26 और टुकड़े मिले. इन 27 टुकड़ों में से तीन को ‘काफ़ी हद तक निश्चित रूप से’ (ऑल्मोस्ट सर्टेनली), फ़्लाइट 370 का माना गया.

इन टुकड़ों के मिलने से उन कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ पर भी विराम लगा, जिनके अनुसार ये विमान उड़ते-उड़ते, किसी दूसरे डाईमेंशन में चला गया था, या टाइम ट्रैवल पर निकल पड़ा था. कुछ थ्योरीज़ तो इतनी वियर्ड थीं कि कहती थीं, आकाश के बीच में एक वॉर्म होल था. विमान उसमें घुसकर ब्रह्मांड के किसी दूसरे छोर में पहुंच गया था. हालांकि इन सभी कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ में से किसी में भी बरमूडा ट्राएंगल का ज़िक्र नहीं था, क्यूंकि शायद इन थ्योरीज़ को बनाने वालों और इनपर विश्वास करने वालों को जिऑग्रफ़ी का पूरा ज्ञान था.

खोज, संवेदनाएं और उम्मीदें. (सभी तस्वीरे: AFP) © Lallantop द्वारा प्रदत्त खोज, संवेदनाएं और उम्मीदें. (सभी तस्वीरे: AFP)

इसके अलावा ’रियूनियन’ वाले विंग फ्लैपेरन और तंजानिया में पाए गए दाएं ‘विंग फ्लैप’ के टुकड़ों का अध्ययन करने से ये भी पता चला कि विमान नियंत्रित तरीक़े से नहीं उतर रहा था. मतलब ये कि प्लेन की ‘वाटर लेंडिंग’ या पानी में लेडिंग के सायस प्रयास नहीं किए गए थे.

इन मलबे के टुकड़ों के मिलने के बाद खोज को हिंद महासागर वाले एरिया में फ़ोकस कर दिया गया था.

अंततः मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और चीन की सरकारों ने जनवरी 2017 में MH370 की खोज बंद कर दी. हालांकि एक अमेरिकी कंपनी, ‘ओशीन इन्फिनिटी’ मई 2017 तक खोज जारी रखे हुए थी. जुलाई 2018 में मलेशियाई सरकार ने लापता हुए MH370 पर अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी की. इसमें किसी ‘टेक्निकल खराबी’ की आशंका को असंभव मानकर ख़ारिज किया गया था. और संभावना व्यक्त की गई थी कि विमान के रूट में बदलाव ‘मानवीय कारणों’ के चलते हुआ था. मतलब ये कि ये दुर्घटना ख़ुद से नहीं, किसी ‘मैनुअल इनपुट’ के चलते हुई थी. लेकिन जांच से ये निर्धारित नहीं हो पाया कि फ्लाइट 370 आख़िर अचानक से ग़ायब क्यूं हो गई थी?

सारी टेक्निकल दिक्कत, कमियों, ख़ामियों के इतर एक और चीज़ भी थी, पूरी तरह मानवीय. ग़ुम हुए परिवार वालों का दुःख. (तस्वीर: AFP) © Lallantop द्वारा प्रदत्त सारी टेक्निकल दिक्कत, कमियों, ख़ामियों के इतर एक और चीज़ भी थी, पूरी तरह मानवीय. ग़ुम हुए परिवार वालों का दुःख. (तस्वीर: AFP)

हालांकि MH370 के लापता होने को लेकर इन सालों में काफ़ी स्पष्टता आई है, और उस रात जो कुछ भी हुआ, उसमें से अधिकांश चीज़ों को समझना संभव हो पाया है. लेकिन कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ़्लाइट-डेटा रिकॉर्डर के आज तक न मिल पाने के चलते जितने सवालों के उत्तर मिले हैं, उससे ज़्यादा अनुत्तरित हैं.

# क्या छुपा रहा था मलेशिया-

विमान के गायब होने के एक हफ्ते के भीतर, दी वॉल स्ट्रीट जर्नल ने ‘सैटेलाइट ट्रांसमिशन’ के बारे में पहली रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें संकेत दिया गया था कि हवाई जहाज के ग्राउंड स्टाफ़ से कनेक्शन टूट चुकने के बाद भी वो कई घंटो तक उड़ता रहा था. मलेशियाई अधिकारियों ने बाद में ये बात स्वीकारी थी.

लेकिन दिक्कत ये थी कि मलेशिया और वहां के अधिकारी जांच में बाकी देशों की पूरी तरह सहायता नहीं कर रहे थे. यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका से भेजे गए जांचकर्ताओं और खोजकर्ताओं के एक दल का मानना था कि मलेशिया बहुत कुछ जानता है और वो छुपा रहा है. इसी के चलते प्रारंभिक खोज ‘साउथ चाइना सी’ पर केंद्रित थी. जहां कुछ नहीं मिला. और जब तक सही जगह खोज शुरू हुई, तब तक महत्वपूर्ण शुरुआती समय निकल चुका था.

महीनों चली विमान की खोज बिना किसी बड़े खुलासे के बंद हो गई. (तस्वीर: AFP) © Lallantop द्वारा प्रदत्त महीनों चली विमान की खोज बिना किसी बड़े खुलासे के बंद हो गई. (तस्वीर: AFP)

इसी सब को लेकर 24 मार्च को मलेशियाई प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने घोषणा भी की कि-

‘अंतिम सिग्नल्स’ और इनमारसैट (सैटेलाइट) ट्रांसमिशन का विश्लेषण करके, और यूके एयर एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (AAIB) की जांच से ये निष्कर्ष निकला है कि फ़्लाइट हिंद महासागर के ‘रिमोट’ एरिया में दुर्घटनाग्रस्त हुई है. ये रिमोट एरिया ऑस्ट्रेलिया से 2,700 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम में पर स्थित है.

दी एटलांटिक नाम की अमेरिकी न्यूज़ मैगज़ीन के अनुसार-

अगर मलेशियाई अधिकारी सच्चाई को तुरंत बता देते, तो शायद मलबा मिल जाता और इसका इस्तेमाल हवाई जहाज के अनुमानित स्थान की पहचान करने के लिए किया जा सकता था. ब्लैक बॉक्स बरामद हो सकते थे.

भारत में भी लोग MH370 और उसके यात्रियों की सलामती की दुआ कर रहे थे. (तस्वीर: AFP) © Lallantop द्वारा प्रदत्त भारत में भी लोग MH370 और उसके यात्रियों की सलामती की दुआ कर रहे थे. (तस्वीर: AFP)

उस वक्त मलेशिया के कार्यवाहक परिवहन मंत्री हिशामुद्दीन हुसैन ने कहा-

हमारी सरकार ने फ़्लाइट से जुड़ी सारी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन हम कुछ भी नहीं छिपा रहे हैं. हम बस निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं.

विमान में सवार चीनी यात्रियों के परिवार भी मलेशिया के इस रवैये से नाराज़ थे. वो तो थे ही थे, और उनका नाराज़ होना जायज़ भी था. लेकिन चीन की सरकार भी इस सब से नाराज़ थी और यूं हमारा यक़ीन है कि कोविड-19 को लेकर चीन का जो रवैया रहा था, कम से कम शुरुआत में, उसे देख चुकने के बाद आपने चीन की इस नाराज़गी में एक आयरनी ज़रूर खोज निकाली होगी.

तारीख़ देखें: स्टालिन के अंतिम पांच दिनों में क्या-क्या हुआ था?-

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