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सुखबीर सिंह बादल का ऐलान, SAD की सरकार बनी तो दलित परिवार से होगा Deputy CM

News18 हिंदी लोगो News18 हिंदी 14-04-2021 News18 Hindi
"सुखबीर सिंह बादल का ऐलान, SAD की सरकार बनी तो दलित परिवार से होगा Deputy CM" © News18 हिंदी द्वारा प्रदत्त "सुखबीर सिंह बादल का ऐलान, SAD की सरकार बनी तो दलित परिवार से होगा Deputy CM"

चंडीगढ़. शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल (Shiromani Akali Dal, SAD chief Sukhbir Singh Badal) ने ऐलान किया है कि यदि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव (Upcoming assembly elections) में जीतकर अपनी सरकार बनाती है तो डिप्टी सीएम (Deputy CM) दलित परिवार से होगा. बादल बुधवार को जालंधर में संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर (Baba Sahib Bhimrao Ambedkar) की जयंती पर उनको श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि दोआबा के क्षेत्र में अंबेडकर के नाम पर यूनिवर्सिटी (University) बनाई जाएगी. उन्होंने दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावनाओं के भी संकेत दिए हैं और कहा है कि उनके संपर्क में कई पार्टियां हैं.

देश के सार्वधिक 32 फीसदी दलित पंजाब में

सुखबीर बादल के इस ऐलान से पंजाब में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है क्याेंकि यहां पर राजनीतिक दलों का भविष्य दलित वोटरों पर निर्भर करता है. पंजाब में 32 फीसदी आबादी दलित है जो भारत में सबसे ज्यादा है.यह वर्ग पूरी तरह कभी किसी पार्टी के साथ नहीं रहा है. दलित वोट आमतौर पर कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के बीच बंटता रहा है. बीच में बीएसपी ने इसमें सेंध लगाने की कोशिश की, लेकिन उसे भी एकतरफा समर्थन नहीं मिला. आम आदमी पार्टी के पंजाब में आने से इस वोट का 2017 के चुनाव में कुछ हिस्सा उसे भी मिला था. ऐसे में अब सभी पार्टियां दलित वोटरों पर और ज्यादा फोकस करती रही हैं. विधानसभा चुनाव के करीब एक साल पहले बादल के इस ऐलान को तब तक के लिए मास्टर स्ट्रोक माना जा सकता है जब तक दूसरे राजनीतिक दल दलितों को रिझाने के लिए अपने पते नहीं खोलते हैं.

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दलित वोटरों के वर्ग

पंजाब में दलित वोट अलग-अलग वर्गों में बंटा है. यहां रविदासी और वाल्मीकि दलित भी हैं. देहात में रहने वाले दलित वोटरों में एक बड़ा हिस्सा डेरों से जुड़ा हुआ है. ऐसे में चुनाव के वक्त ये डेरे भी अहम भूमिका निभाते हैं. महत्वपूर्ण है कि दोआबा की बेल्ट में जो दलित हैं, वे पंजाब के दूसरे हिस्सों से अलग हैं. इसकी वजह यह है कि इनमें से अधिकांश परिवारों का कम से कम एक सदस्य एनआरआई है. इस नाते आर्थिक रूप से ये काफी संपन्न हैं. इनका असर फगवाड़ा, जालंधर और लुधियाना के कुछ हिस्सों में है.

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