आप ब्राउज़र के पुराने संस्करण का उपयोग कर रहे हैं. MSN का सर्वश्रेष्ठ अनुभव प्राप्त करने के लिए, कृपया किसी समर्थित संस्करण का उपयोग करें.

FRBs: हमारी आकाशगंगा Milky Way में घूम रहा रहस्यमय सिग्नल, ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली चुंबक से निकला?

नवभारत टाइम्स लोगो नवभारत टाइम्स 07-07-2021
© नवभारत टाइम्स द्वारा प्रदत्त

वॉशिंगटन

पिछले साल अप्रैल में दो रेडियो टेलिस्कोप्स ने पहली बार धरती के करीब फास्ट रेडियो बर्स्ट को डिटेक्ट किया था। ये हमसे 30 हजार प्रकाशवर्ष दूर थी। ये पलक झपकते ही ओझल हो गई थी। इसके पहले FRBs को हमारी गैलेक्सी के अंदर डिटेक्ट नहीं किया गया था। ये अरबों प्रकाशवर्ष दूर से गुजरा करती थीं, इसलिए इन्हें स्टडी करना आसान नहीं था। अब माना जा रहा है कि इस FRB के स्रोत का पता भी चल सकता है।

कनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट (CHIME) और सर्वे फॉर ट्रांजियंट ऐस्ट्रोनॉमिकल रेडियो एमिशन (STARE2) ने इसे डिटेक्ट किया था। मैसच्यूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में असिस्टेंट प्रफेसर ऑफ फिजिक्स कियोशी मासुई का कहना है कि ये ऐसे स्रोत से आते हैं जो कुछ सौ किलोमीटर बड़ा ही होगा। संभावना है कि ये न्यूट्रॉन स्टार से आती हो क्योंकि दोनों बहुत छोटे और एनर्जी से भरे होते हैं।

82913099

कहां से आईं FRB?

दूसरे टेलिस्कोप्स से मिले डेटा के आधार पर माना जा रहा है कि ये FRB किसी मैग्नेटर से आए होंगे। ये ऐसे न्यूट्रॉन स्टार होते हैं जो किसी सुपरनोवा से बनते हैं और इनकी मैग्नेटिक फील्ड धरती से 5 हजार ट्रिल्यन गुना ज्यादा शक्तिशाली होती है। इससे ये ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली चुंबक माने जाते हैं।

ऐसी संभावना इसलिए ज्यादा जताई जा रही क्योंकि इनकी उत्पत्ति Vulpecula तारामंडल की है और वहीं एक गैलेक्टिक मैग्नेटार SGR 1935+2154 भी मौजूद है। इसी दौरान इससे निकलने वाली एक्स-रे बर्स्ट को भी डिटेक्ट किया गया।

80267450

स्रोत की खोज अहम, मुश्किल

गैलेक्सी में जहां से FRB आ रहे हैं, वहां क्या हो रहा है, यह भी समझा जा सकता है। सूरज जितनी ऊर्जा एक साल में उत्सर्जित करता है, FRB उतनी एक पल के हजारवें हिस्से में करते हैं। ऐसे में उनके बारे में जो खोज होगी, उससे उनके बारे में ज्यादा समझने में मदद मिलेगी। समस्या यह होती है कि ये इन्हें सिर्फ कुछ मिलिसेकंड के लिए ऑब्जर्व किया जा सकता है और ये कब होंगी, इसके बारे में पता नहीं होता। इससे उनके स्रोत या वजह के बारे में पता करना मुश्किल होता है।

More from Navbharat Times

नवभारत टाइम्स
नवभारत टाइम्स
image beaconimage beaconimage beacon